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*🥀 नमाज़ हर मोमिन मुसलमान पर फर्ज है 🥀*
*✔️(पार्ट 02)*
✏️ नमाज़ के बारे में शरीअ़त का हुक्म ये है कि जब बच्चा 7 साल का हो जाये तो उसे नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा सिखायें (अगर खुद जानते हैं तो) आज कल जो खुद नहीं जानते वो भी दूसरों को सिखाने निकल पड़ते हैं। अगर आप नहीं जानते तो पहले अच्छी तरह सीख लें, ताकि बच्चे को सिखा सकें।
जब बच्चा 10 साल का हो जाये तो उसे नमाज़ पढ़ने का कहें, उस पर नर्मी बर्तें और अगर ना माने तो सिद्दत इख्तियार करें और मार मार कर नमाज़ पढ़वायें।
आज कल देखा ये जाता है कि लोग नमाज़ पढ़ने के लिये तो नहीं मारते लेकिन स्कूल भेजते वक़्त काफ़ी सिद्दत दिखाते हैं। हमने देखा है कि कई लोग अपने बच्चों को घसीट कर स्कूल ले जाते हैं लेकिन नमाज़ की बात आये तो बस इतना कह देंगे "बेटा नमाज़ पढ़ा करो" और इस से ज़्यादा कहने की हिम्मत इसीलिये भी नहीं करते क्योंकि दूसरों को कहने से पहले खुद को भी देखना ज़रूरी है।
अब जो बाप खुद बे नमाज़ी हो, वो नमाज़ के लिये बेटे के साथ कभी मार पीट कर सकता है? बेटा भी पलट कर कह सकता है कि आप क्यों नहीं पढ़ते?
नमाज़ के हवाले से नर्मी के साथ सख्ती की भी ज़रूरत है।
जहाँ आप अपने बच्चों को दूसरे कामों के लिये मजबूर करते हैं वहीं नमाज़ के लिये भी उन पर खास प्रेसर दें। उन्हें इसकी अहमिय्यत समझायें और पहले खुद भी अ़मल करें।
*🔛 जारी है.......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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