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*🥀 नमाज़ हर मोमिन मुसलमान पर फर्ज है 🥀*
*✔️ पार्ट 56*
✏️ (4) मनी के निकलने के बाद अगर ना सोया, ना पेशाब किया और ना 40 क़दम चला और नहा लिया और नमाज़ पढ़ ली फिर बाक़ी मनी निकली तो गुस्ल करे क्योंकि ये उसी मनी का हिस्सा माना जायेगा जो शहवत के साथ जुदा हुई थी और जो नमाज़ पढ़ी थी वो हो गयी, अब दोहराने की हाजत नहीं और अगर सोने, पेशाब करने या 40 क़दम चलने के बाद गुस्ल किया फिर मनी निकले तो ये पहली वाली का हिस्सा नहीं मानी जायेगी और गुस्ल करना ज़रूरी नहीं होगा।
(5) पेशाब के वक़्त अगर मनी निकल जाये तो गुस्ल वाजिब नहीं।
ऐसा मनी का पतला हो जाने से होता है इस से वुज़ू टूट जाता है।
(6) एहतिलाम हुआ तो इस की चंद सूरतें हैं :
(a) अगर सो कर उठा और कपड़े या बदन पर तरी पायी और मज़ी या मनी होने का यक़ीन है या शक़ है तो गुस्ल वाजिब हो जायेगा, चाहे ख्वाब देखना याद हो या ना हो।
(b) अगर यक़ीन है कि ये तरी ना मनी है ना मज़ी बल्कि पेशाब या पसीना या वदी है तो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा अगरचे ख्वाब याद हो।
(c) अगर यक़ीन है कि मनी नहीं लेकिन मज़ी होने पर शक है तो अब ख्वाब का एतबार होगा, अगर ख्वाब याद है तो गुस्ल फर्ज़ होगा वरना नहीं।
(d) अगर एहतिलाम होना याद है मगर कपड़े या बदन पर कोई असर नहीं तो गुस्ल फर्ज़ नहीं।
(e) अगर सोने से पहले आला (आगे की शर्मगाह) क़ाइम था यानी टुंडी की हालत में था (खड़ा था) चाहे वो गंदे खयालात या गंदी तस्वीरों या वीडियोज़ की वजह से हो और ऐसी हालत में सो गया और जागने पर असर देखा तो अब अगर गालिब गुमान है कि मनी नहीं बल्कि मज़ी पर ज़्यादा शक है और ख्वाब याद नहीं तो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा और अगर मनी होने का ज़्यादा शक है तो गुस्ल वाजिब है और अगर सोने से पहले टुंडी दब चुकी थी तो फिर पहली सूरत जो बयान हुई कि कपड़े या मनी होने का यक़ीन है या शक है तो गुस्ल वाजिब हो जायेगा, चाहे ख्वाब देखना याद हो या ना हो।
*जारी है......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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