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*🥀 नमाज़ हर मोमिन मुसलमान पर फर्ज है 🥀*



*✔️ पार्ट 57*

✏️ एहतिलाम की सूरतें जो बयान की गई उस का खुलासा ये है कि दो सूरतों में गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा पहली ये कि जो तरी दिख रही है उस के बारे में यक़ीन है कि मनी या मज़ी नहीं बल्कि कुछ और है और दूसरी ये कि ख्वाब याद है और कोई असर मौजूद नहीं।

एक सूरत में ख्वाब के एतबार से माना जायेगा कि गुस्ल फर्ज़ हुआ या नहीं और वो ये है कि मनी के ना होने पर यक़ीन है और मज़ी होने पर शक है तो ख्वाब याद है तो गुस्ल फर्ज़ है वरना नहीं।

एक सूरत ये है कि जब कोई नॉरमल हालत में नहीं सोया बल्कि खास हालत में सोया यानी उसका आला क़ाइम था (तुंडी की हालत में था तो ऐसे में मस'अला थोड़ा अलग है और वो ये कि मज़ी पर ज़्यादा शक है और एहतिलाम याद नहीं तो गुस्ल फर्ज़ नहीं हालाँकि नॉरमल हालत में सोता तो मनी का शक होने से भी गुस्ल फर्ज़ हो जाता पर यहाँ मस'अला बदल जाता है और अगर ऐसी हालत में मनी पर ज़्यादा शक है तो गुस्ल फर्ज़ है।

ये मसाइल कई लोग नहीं जानते और हमने आसान लफ्ज़ों में समझाने की पूरी कोशिश की है, अगर इसे दो तीन मरतबा गौर से पढ़ा जाये तो अच्छी तरह समझ में आ जायेगा।

*जारी है.......*



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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

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