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*🥀 नमाज़ हर मोमिन मुसलमान पर फर्ज है 🥀*
*✔️ पार्ट 61*
✏️ (16) औरत हैज़ से फारिग हुई, गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा।
(17) निफ़ास के खत्म होने से भी गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा।
हैज़ व निफ़ास की तफ़सील आगे बयान की जायेगी।
(18) जुम्आ, ईद, बक़र ईद के दिन और एहराम बांधते वक़्त नहाना सुन्नत है।
(19) गुस्ल इन मौक़ों पर मुस्तहब है :
वुक़ूफे अराफात,
वुक़ूफे मुज़्दलिफ़ा,
हाज़िरी-ए- हरम,
हाज़िरी-ए- सरकारे आज़म,
तवाफ़,
दुखूले मिना,
और कंकरिया मारने के लिये तीनों दिन,
शबे बराअत,
शबे क़द्र,
और अरफ़ा की रात,
मज्लिसे मीलाद,
और दीगर मजालिसे खैर की हाज़िरी के लिये,
मुर्दा नहलाने के बाद,
मज्नून का जुनून जाने के बाद,
गसी के बाद,
नशा जाते रहने के बाद,
नया कपड़ा पहनने के बाद,
तौबा करने के बाद,
सफ़र से आने वाले के लिये,
इस्तिहाज़ा का खून बन्द होने के बाद,
नमाज़े कसूफो खुसूफ व इस्तिस्क़ा के लिये और खौफ़ व तारीकी और सख्त आँधी के लिये,
और बदन पर नजासत लगी हो पर मालूम ना हो कि कहाँ लगी है।
*जारी है........*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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