नमाज़ हर मोमिन मुसलमान पर फर्ज है

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*🥀 नमाज़ हर मोमिन मुसलमान पर फर्ज है 🥀*



*✔️ (पार्ट 10)*

✏️ आसान लफ्ज़ों में ये समझिये कि पेशाब करने या हवा निकलने से भी इन्सान नापाक हो जाता है लेकिन ये नापाकी हदसे असगर होती है यानी छोटी वाली नापाकी और इसके लिये वुज़ू काफ़ी है।

मनी निकलने पर भी इंसान नापाक हो जाता है लेकिन ये नापाकी हदसे अकबर होती है यानी बड़ी नापाकी और इस से पाक होने के लिये गुस्ल की ज़रूरत होती है।

अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि पेशाब करने या हवा निकलने से गुस्ल फर्ज़ नहीं होता क्योंकि ये हदसे असगर है।
आपको वही एप्लाई करना है जिस की ज़रूरत है।

कुछ लोगों के जिस्म से कुत्ता सट गया तो नहाना शुरू कर देते हैं,
कीचड़ लग जाये तो समझते हैं कि नहाना होगा,
पेशाब के क़तरे निकल गये तो समझते हैं कि गुस्ल फर्ज़ हो गया,
सिर्फ़ मज़ी (मनी से पहले निकलने वाली चीज़) निकलने पर ये गुमान करते हैं कि गुस्ल फर्ज़ हो गया, हालाँकि ऐसा कुछ नहीं है।

गुस्ल कब फर्ज़ होता है और कब वुज़ू काफ़ी होता है ये हम तफ़सील से बयान करेंगे, आपको बस ये क़ाइदा याद रखना है कि छोटी नापाकी के लिये वुज़ू और बड़ी नापाकी के लिये गुस्ल।
अब छोटी नापाकी और बड़ी नापाकी कौन कौन सी हैं तो इसे हम आगे बयान करेंगे।

कुछ लोग ऐसी बातों को हदसे असगर समझते हैं, जिनका नापाकी से ताल्लुक़ ही नहीं मस्लन गाली देने से वुज़ू का टूट जाना, तम्बाखू खाने से वुज़ू का टूट जाना, जिस्म का छुपा हुआ हिस्सा दिख जाने से.....वग़ैरह।
ये सब हदस है ही नहीं तो इन से वुज़ू या गुस्ल पर फर्क़ पड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

*✔️ जारी है.......*

 

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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

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